अन्नपूर्णा माता

✽कुलदेवी   ✽अन्नपूर्णा माता          

✽गोत्र      ✽खराड़ा, गंगसिया, चुवाणा, भढ़ाढरा, महीचाल,रावणसेरा, रुगलेचा


अन्नपूर्णा देवी हिन्दू धर्म में मान्य देवी-देवताओं में विशेष रूप से पूजनीय हैं। इन्हें माँ जगदम्बा का ही एक रूप माना गया है, जिनसे सम्पूर्ण विश्व का संचालन होता है। इन्हीं जगदम्बा के अन्नपूर्णा स्वरूप से संसार का भरण-पोषण होता है। अन्नपूर्णा का शाब्दिक अर्थ है- 'धान्य' अन्न की अधिष्ठात्री। सनातन धर्म की मान्यता है कि प्राणियों को भोजन माँ अन्नपूर्णा की कृपा से ही प्राप्त होता है।







   

यह मदिर दीपावली से पूर्व धन तेरस पर चार दिनों के लिए वर्ष में सिर्फ एक ही बार खोला जाता है, यहां पर लाखों भक्तों के बीच मंदिर में खजाना बांटा जाता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा में खजाने के साथ-साथ भक्तों को अन्नों में नये धान बाली और लावा दिया जाता है। माना जाता है कि अन्नपूर्णा मंदिर देश का इकलौता ऐसा मंदिर है| जहां धनतेरस पर्व पर खजाना और अन्न बंटता है। इसे घर के तिजोरी और पूजा स्थल पर रखने से घर परिवार में वर्ष पर्यन्त अन्न धन की कमी नहीं रहती


अन्नपूर्णा देवी मंदिर पवित्र शहर वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का हिंदू धर्म में महान धार्मिक महत्व है जो देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है। माता अन्नपूर्णा पोषण की देवी है और देवी पार्वती का एक रूप है| अन्नपूर्णा देवी मंदिर का निर्माण नागाारा वास्तुकला में किया गया है जिसमे बड़े खम्भों के साथ एक छत है| मंदिर में माता अन्नपूर्णा देवी की दो मूर्तियां हैं| एक सोने की तो दूसरी पीतल की है| पीतल की मूर्ति दैनिक दर्शन के लिए उपलब्ध है| जबकि सोने की मूर्ति का दर्शन वर्ष में केवल एक बार किया जा सकता है| सोने की बनी मूर्ति भी मंदिर प्रांगण में ही प्रथम ताल पर स्थित मंदिर में स्थापित है|

✽श्री अन्नपूर्णा देवी जी की आरती✽  

बारम्बार प्रणाम मैया बारम्बार प्रणामजो नहीं ध्यावे तुम्हें अमिबके,कहां उसे विश्राम|अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारोप्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,कालान्तर तक नाम|सुर सुरों की रचना करती,कहाँ कृष्ण कहं राम||चूमहि चरण चतुर चतुरानन,चारू चक्रधर श्याम |चन्द्र चूड़ चन्द्रानन चाकर,शोभा लखहि ललाम||देवी देव| दयनीय दशा में,दया दया तब जाम |त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,शरणरूप तब धाम||श्री ह्रीं श्रद्धा भी ऐ विधा,श्री कलीं कमला काम|कानित भ्रांतिमयी कांतिशांति,सयीवर दे तू निष्काम ||

1 comments:

Unknown said...

Ye माता rawnsera gotr की hii he kya agr Haa to khaa he or पूरी detel दे plz